बुरहानपुरमध्य प्रदेश

राज्य सूचना आयुक्त की बड़ी कार्यवाही
तत्कालीन सीएचएमओ पर जमानती वारंट जारी हेल्थ कमिश्नर को शोकाज़

बुरहानपुर (अकील आज़ाद) शासकीय कार्य में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से वर्ष 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया गया ताकि आम व्यक्ति भी शासकीय कार्यालयों में होनेवाले कामकाज की जानकारी आसानी के साथ हासिल कर सके लेकिन प्रशासन में बैठे अधिकारी नियम कानून की किस प्रकार धज्जियां उड़ाते हैं उसका उदाहरण इस मामले से सामने आता है कि नियमों का पालन नहीं करने पर उन्हें स्वयं सजा भुगतना होता है ताजा मामला बुरहानपुर सी एच एम ओ कार्यालय से संबंधित है जहां आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश राव सोनवणे ने वर्ष 2017 में सीएचएम ओ डी एस चौहान के कार्यकाल में वाहन चालकों की भर्ती और नियुक्ति को लेकर जानकारी मांगी जो लंबे समय तक नहीं दी गई जिस पर राज्य सूचना आयोग में दोषी अधिकारियों पर 25 हज़ार का जुर्माना भी लगाया इसके बाद भी आरटीआई कार्यकर्ता को जानकारी नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग से गुहार लगाने पर हाल ही में सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दोषी अधिकारी डा,विक्रम सिंह जो बुरहानपुर में वर्तमान में जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं उनके खिलाफ 5 हज़ार का जमानती वारंट जारी कर हेल्थ कमिश्नर को भी शो कॉज नोटिस जारी किया है दरअसल मामला यह है कि वर्ष 2017 में बुरहानपुर सी एच एम ओ कार्यालय में वाहन चालकों की भर्ती की गई थी जिस की जानकारी आरटीआई के माध्यम से दिनेश राव सोनवणे में मांगी लंबे इंतजार के बाद विभाग जानकारी देने को राजी होकर जानकारी के एवज 4 हज़ार रुपया जमा कराए गए बावजूद इसके जानकारी नहीं देने पर मामला सूचना आयुक्त तक पहुंचा वहां उस समय वर्ष 2020 में बुरहानपुर सीएचएमओ के पद पर पदस्थ रहे डॉ विक्रम सिंह ने मामले में सीएचएमओ की हैसियत से राज्य सूचना आयोग में उपस्थित हुए परंतु सूचना आयोग के निर्देश के बाद भी संबंधित को चाही गई जानकारी नहीं देने के मामले में अब सूचना आयोग ने उनके खिलाफ 5000 रुपए का जमानती वारंट जारी किया है जिस की तामिली की जिम्मेदारी आईजी इंदौर के ज़िम्मे दीगई है जमानती वारंट के माध्यम से डॉ विक्रम सिंह को 11 अक्टूबर को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर आयोग के आदेशों की अवहेलना का जवाब देना होगा जब इस पूरे मामले पर जानकारी के लिए डॉक्टर विक्रम सिंह से संपर्क का प्रयास किया गया तो वह कहीं भी उपलब्ध नहीं हो सके। सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं होने पर राज्य सूचना आयोग की इस कार्यवाही को अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही माना जा रहा है।

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