बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) जिला अस्पताल का तुगलकी फरमान, अब खून और पेशाब की जांच के लिए चढ़नी होगी तीसरी मंजिल बुरहानपुर जिले का शासकीय जिला अस्पताल एक बार फिर अपने अव्यवस्थित निर्णयों को लेकर चर्चा में है। अस्पताल प्रशासन ने नए आदेश के तहत ग्राउंड फ्लोर पर संचालित पैथोलॉजी लैब को तीसरी मंजिल पर स्थानांतरित कर दिया है। इस फैसले के बाद मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां बढ़ना तय माना जा रहा है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार मरीज और छोटे बच्चे भी शामिल होते हैं। ऐसे मरीजों को अब खून, पेशाब तथा अन्य जांच कराने के लिए तीसरी मंजिल तक जाना पड़ेगा। कई मरीजों के लिए सीढ़ियां चढ़ना आसान नहीं होता और यदि लिफ्ट बंद हो या अधिक भीड़ हो, तो उनकी परेशानी कई गुना बढ़ जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य मरीजों को बेहतर और सुविधाजनक उपचार उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यह निर्णय मरीजों की सुविधा के विपरीत दिखाई देता है। पहले ग्राउंड फ्लोर पर लैब होने से जांच के लिए पहुंचना आसान था, वहीं अब मरीजों को तीसरी मंजिल तक बार-बार आना-जाना पड़ेगा। जिस से मरीजों की शारीरिकपरेशानी भी बढ़ेगी स्थानीय नागरिकों और मरीजों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले मरीजों की सुविधा और व्यवहारिक परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था। यदि किसी प्रशासनिक कारण से लैब को स्थानांतरित करनाआवश्यक था, तो वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षा रहती है। ऐसे में प्रशासन को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार कर मरीज हित में पैथोलॉजी लैब को पुनः सुविधाजनक स्थान पर संचालित करने या ऐसी व्यवस्था करने की आवश्यकता है, जिससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। डॉक्टर दर्पण टोके के सिविल सर्जन बनने के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में परिवर्तन अवश्य आया है लेकिन अस्पताल प्रशासन का या निर्णय मरीज के हित में दिखाई नहीं देता नजर आ रहा है!











