बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) नगर निगम परिषद अब केवल नाम की परिषद बनकर रह गई है, सत्ता से लेकर विपक्ष तक के सभी पार्षद मौन अपनी पार्षदी को सुशोभित करते नजर आ रहे हैं। शहर में सड़क से लेकर गली मोहल्ले तक सैकड़ो समस्याएं हैं साफ-सफाई के नाम पर केवल कचरा वाहन ध्वनि प्रदूषण फैलते नजर आ रहे हैं, परिषद बैठक को चार माह का समय बीतने के बाद अब फिर बैठक आहूत होने की कवायत निगम अध्यक्ष की ओर से शुरू की गई है, पिछली 21 अक्टूबर की बैठक के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच खूब तीखी नोंक झोंक हुई मामला कलेक्टर एसपी से लेकर संभाग आयुक्त तक पहुंचा विपक्ष ने पूरे मामले को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही लेकिन चार माह बीतने के बाद भी विपक्ष कुछ नहीं कर सका और अब फिर परिषद की बैठक बुलाने के लिए अध्यक्ष की ओर से नियम कायदों का हवाला देकर नोट शीट आयुक्त को लिखी गई है इस से पूर्व भी निगम अध्यक्ष अनेक बार बैठक बुलाने बजट नियम विरुद्ध पास होने को लेकर लिख चुकी है पर ––? और अब फिर बैठक बुलाने की बात की जा रही है विपक्ष अपनी भूमिका पर खड़ा नहीं विपक्षी पार्षद यतीम फिर भी भला ऐसे में बैठक कैसे होगी शहर का विकास कैसे होगा विपक्षी पार्षदों की शिकायत है कि उनके नेता ही उनके साथ नहीं तो फिर सत्ता पर दबाव किसका अब अगर विपक्षी पार्षदों को सत्ता पक्ष और अपने नेताओं को अपना असर दिखाना है तो सभी को सामूहिक रूप से त्यागपत्र देकर निगम परिषद को भंग कर फिर से जनता की अदालत में खड़े होने की जरूरत है क्योंकि लगभग 3 वर्ष का समय होने को है परंतु पार्षद बनने के बाद कोई काम नहीं हुए तो बेहतर है कि सामूहिक त्यागपत्र शहर का भला कर राजनेताओं को कुछ करने की सीख दे सकता है।