बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) यूनिफॉर्म सिविल कोड यूसीसी के विरोध में मुस्लिम समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। समाजजनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूसीसी के माध्यम से पर्सनल लॉ में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था पर सीधा प्रहार है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज जन एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और उसके अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। ऐसे में शरीयत कानून में बदलाव या उसमें दखल देना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा, बल्कि यह संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन होगा। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसमें किसी भी प्रकार का बदलाव समुदाय के लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि यूसीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी समुदायों से व्यापक संवाद किया जाए और उनकी सहमति के बिना कोई निर्णय न लिया जाए इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर उसे उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। समाजजनों ने यह भी कहा कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।बुरहानपुर में हुआ यह विरोध प्रदर्शन यह दर्शाता है कि यूसीसी का मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है, जिस पर संतुलित और समावेशी विचार-विमर्श की आवश्यकता है। गुरुवार को शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम के फर्जंद अनवार अल्लाह बुखारी के नेतृत्व में समाज के पार्षद व अन्य नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित मस्जिद के पेश इमाम इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए!











