बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण पूरे परिवार के साथ रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र गुजरात और कर्नाटक की ओर पलायन कर रहे हैं जबकि इस वर्ष चुनाव आयोग 21 वर्षों के बाद मतदाता सूचियां का विशेष पुनरीक्षण कर मतदाता की सत्यता को परखने जा रहा है जिसका आधार वर्ष 2004 की मतदाता सूची को बनाया गया है अब ऐसे में जब की मतदाताओं को अपने क्षेत्र में रहकर अपने मतदाता होने का प्रमाण देना है लेकिन ग्रामीण अंचलों के यहां ग्रामीण एसआईआर की इस महत्वता को नहीं जानते इन्हें पलायन से रोकने की कोई पहल भी सामने नहीं आ रही है 4 नवंबर से बिएलओ और सत्यापन अधिकारी 4 नवंबर से अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचकर मतदाता के घर दस्तक देंगे ऐसे में इन पलायन कर चुके मतदाताओं का सत्यापन कैसे होगा क्षेत्र में रोजगार की कमी के चलते हर वर्ष जिले के ग्रामीण अंचलों से सैकड़ो परिवार रोजी रोजगार के लिए पलायन करते हैं लेकिन इस वर्ष विशेष यह है कि चुनाव आयोग एसआईआर कार्यक्रम चलाकर बोगस मतदाताओं की जांच पड़ताल कर मतदाता सूचियां को अंतिम रूप देना चाहता है राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों में विभिन्न प्रकार की रोजगार मूलक योजनाएं चलती है लेकिन वह न काफी साबित हुई है जिसका प्रमाण ग्रामीण अंचलों से ग्रामीणों का पलायन है अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग ऐसे मामले में छूट चुके मतदाताओं को किस प्रकार सत्यापन की सूची में शामिल कर पता है वही एक सत्यता यह भी है कि हर वर्ष मतदाता सूची उद्धातन कार्यक्रम में जो सूचियां सामने आती है उसमें भी हजारों मतदाताओं के नाम सूची से नदारत होते हैं ऐसे में वर्ष 2004 की मतदाता सूची को आधार बनाकर मतदाता सत्यापन करना कितना उचित है जिस पर कांग्रेस पहले ही सवाल खड़े कर चुकी है












