पावन पर्व शब ए बरात हमें आत्मचिंतन, पश्चाताप और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) शब ए बरात मुस्लिम समाज का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण त्यौहार है मुस्लिम समाज के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, यह एक आध्यात्मिक महत्व वाला पर्व है, जिसे इस्लामी कैलेंडर के अनुसार शाबान माह की 14वीं और 15वीं तारीख की रात को मनाया जाता है। ‘शबे’ का अर्थ है रात और ‘बरात’ का अर्थ है मुक्ति या क्षमा। इस प्रकार शबे-बरात को गुनाहों से मुक्ति और अल्लाह की रहमत पाने की रात माना जाता है। इस रात मुस्लिम समाज के लोग अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। मस्जिदों और घरों में विशेष नमाज़ अदा की जाती है, कुरान शरीफ की तिलावत अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगे जाने की रात है यह माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के पिछले गुनाहों को माफ करता है और आने वाले साल की तक़दीर लिख देता है। शबे-बरात के दिन का एक महत्वपूर्ण पहलू अपने पुरखों और दिवंगत परिजनों को याद करना है। लोग कब्रिस्तान जाकर अपने उन रिश्तेदारों की कब्रों पर फूल और चढ़ाते हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। वहां फातिहा पढ़ी जाती है और उनकी मगफिरत के लिए दुआ की जाती है। इस अवसर पर लोग गरीबों और जरूरतमंदों को दान करते हैं और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं। शबे-बरात हमें आत्मचिंतन, पश्चाताप और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है। यह पर्व इंसान को यह सिखाता है कि जीवन क्षणभर का है और अच्छे कर्म ही इंसान की असली पूंजी हैं।इस प्रकार शबे-बरात मुस्लिम समाज में आस्था, श्रद्धा और मानवता का प्रतीक पर्व माना गया है।

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