बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) नगर निगम परिषद की बैठक का बार बार स्थगित होना स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 22 अप्रैल को लगभग 10 माह के लंबे अंतराल के बाद परिषद की बैठक बुलाई गई थी, जिसे बजट बैठक के रूप में आयोजित किया गया। इस बैठक में बजट पटल पर रखने के बाद 20 मई को अगली बैठक के लिए तिथि निर्धारित की गई थी। लेकिन 19 मई की मध्यरात्रि को अचानक सचिवालय द्वारा पार्षदों को व्हाट्सएप संदेश भेजकर 20 मई की बैठक को स्थगित करने की सूचना दी गई। जिसका कारण अपरिहार्य बताया गया और अगली तिथि बाद में सूचित करने की बात कही गई इस घटनाक्रम ने परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष और शंकाएं उत्पन्न कर दी हैं। कानून के जानकारों का स्पष्ट मत है कि जब किसी बैठक में अगली बैठक की तिथि विधिवत तय कर दी जाती है, तो उस दिन बैठक का आयोजन करना अनिवार्य होता है। यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में बैठक स्थगित करनी भी हो, तो उसके लिए पारदर्शी और औपचारिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। केवल व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से सूचना देना न केवल प्रक्रिया की गंभीरता को कम करता है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस मामले में परिषद अध्यक्ष की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। आरोप यह है कि बैठक स्थगित कर उन्होंने नियमों की अवहेलना की है और सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। नगर निगम का 20 मई का सम्मेलन निरस्त होने पर विपक्ष की ओर से खुलकर कोई विरोध सामने नहीं आया है जिस से यह आरोप सही मालूम होता नजर आ रहा है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, जहां पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए। नगर निगम परिषद शहर के विकास, बजट आवंटन और जनहित के महत्वपूर्ण निर्णय लेने का मंच है। बैठकों का समय पर नहीं होना और होने पर बार-बार बैठकों का स्थगित होना न केवल विकास कार्यों को प्रभावित करता है, बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है। आवश्यक है कि परिषद की बैठकों का संचालन नियमों के अनुसार समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से किया जाए, ताकि जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से विचार हो सके और प्रशासनिक व्यवस्था में भरोसा कायम रहे।












