बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) शहर में लंबे इंतज़ार और जनता की अनेक मन्नतों के बाद प्रमुख मार्गों का निर्माण कायाकल्प योजना के तहत नगर निगम द्वारा कराया गया था। नगर निगम ने इन सड़कों को सीसी रोड और डामरीकरण के रूप में तैयार करते समय यह भरोसा दिलाया था कि अब इन मार्गों को दोबारा नहीं खोदा जाएगा। इस वादे के साथ ही पहले सिवरेज योजना और जल आवर्धन योजना के सभी जरूरी काम पूरे किए गए, ताकि नई बनी सड़कों को भविष्य में नुकसान न पहुँचे। उस समय लगा था कि अब शहर की सड़कों की बदहाल स्थिति से राहत मिलेगी। लेकिन कुछ ही समय बाद हालात पूरी तरह बदलते दिखाई दे रहे हैं। शहर के कई ऐसे मार्ग, जिनका निर्माण हाल ही में कायाकल्प योजना के तहत हुआ था, उन्हें दोबारा खोद दिया गया है। जगह जगह बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं और यह काम एक निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। इससे न केवल करोड़ों रुपये की लागत को पलीता लग रहा है बल्कि आम नागरिकों को भी फिर एक बार भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम ने पहले ही यह घोषणा की थी कि नई सड़कों को दोबारा नहीं खोदा जाएगा, तो फिर निजी कंपनी को इसकी अनुमति किस आधार पर दी गई। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर योजनाओं के बीच समन्वय की कमी दुर्भाग्य की बात यह भी है कि इस पूरे मामले पर और अधिक चिंताजनक स्थिति विपक्ष की है, जो इस मुद्दे पर पूरी तरह मौन दिखाई दे रहा है। जनता से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर विपक्ष का यूँ कुंभकरण की नींद सोना लोकतंत्र के लिए भी चिंताजनक है। जरूरत इस बात की है कि नगर निगम इस मामले में पारदर्शिता लाए, जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगे और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए ठोस व्यवस्था करे।










