आई लव मोहम्मद कहना किसी धर्म का अपमान नहीं संवैधानिक अधिकार है

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) हाल ही में आई लव मोहम्मद को लेकर उठे विवाद ने देश की शांति व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। विशेष रूप से कानपुर में हुई घटना ने सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है की क्या हम सहिष्णुता की राह पर सही दिशा में बढ़ रहे हैं। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। कोई भी व्यक्ति अपने धर्म और धर्मगुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट कर सकता है। ऐसे में “आई लव मोहम्मद” जैसा भावनात्मक वाक्य किसी भी रूप में आपत्तिजनक नहीं माना जा सकता। लेकिन इस मुद्दे को लेकर जिस प्रकार से हिंसा, विरोध और तनाव का वातावरण बना वह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरा है। हजरत मोहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म की तालीम में हमेशा शांति, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश दिया। इंसानियत की राह दिखाई। देश विरोधी ताकतें ऐसे धार्मिक मुद्दों को भड़काकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास करती रही है लेकिन हमें संयम और संवेदनशीलता के साथ ऐसे हालातों का सामना करना चाहिए। कानून का पालन करते हुए, आपसी संवाद और समझ से ही हम सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रख सकते हैं।

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