कट्टरपंथी विचारधारा राष्ट्र की एकता और अखंडता को खतरा

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) कट्टरपंथी विचारधारा किसी भी समाज या देश के लिए एक गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकती है। यह न केवल समाज के विभिन्न वर्गों के बीच असहमति और तनाव को बढाती है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए भी खतरा उत्पन्न करती है। कट्टरपंथी विचारधारा के समर्थक अक्सर धार्मिक, सांस्कृतिक, या जातिगत मुद्दों पर असहमत होते हैं, जो समाज में विभाजन पैदा करते है। आजकल यह समस्या केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक संदर्भ तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह राजनीतिक दृष्टिकोणों और आर्थिक व्यवस्थाओं में भी घुसपैठ कर चुकी है। इससे समाज में असहिष्णुता बढ़ती है और लोग एक-दूसरे के विचारों या विश्वासों को सहन नहीं कर पाते। कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव से देश की नीति और सामाजिक ढाँचा भी प्रभावित होता है, जो अंततः लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है। समाज में शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए कट्टरपंथी विचारों का विरोध करना आवश्यक है। यह केवल राजनीति से संबंधित नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का सवाल है। केवल खुले विचारों और संवाद के माध्यम से हम एक समान और सहिष्णु समाज की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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