मौसम का मिजाज बदला, बच्चों पर बीमारियों का प्रकोप डायरिया के मरीज बढ़े, कुपोषण के लक्षणों ने बढ़ाई चिंता

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) मौसम में बदलाव के साथ ही संक्रामक बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगा है। इसका सबसे अधिक असर बड़े बुढो के साथ बच्चों के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल में इन दिनों डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार, सर्दी-खांसी सहित अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालात यह हैं कि अब तक सैकड़ो बच्चों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है। बड़ी संख्या में बच्चों में डायरिया के मामले सामने आने से चिंता बढ़ गई है।मौसम के बदलते मिजाज के बीच बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होने के कारण वे संक्रामक बीमारियों की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। डायरिया के कारण बच्चों के शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो रही है। लंबे समय तक बीमारी से जूझ रहे बच्चों में कमजोरी और कुपोषण जैसे लक्षण भी सामने आने लगे हैं। ऐसे में बीमारी से लड़ने के साथ बच्चों के पोषण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है। अस्पताल में मरीजों का दबाव भी बढ़ गया है जिला अस्पताल की ओपीडी में बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ ही वार्डों में भी मरीजों का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अभिभावक बीमार बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। कई बच्चों को गंभीर स्थिति में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या के चलते अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। डायरिया सहित संक्रामक बीमारियों के बढ़ने के पीछे मौसम परिवर्तन के साथ दूषित पानी, अस्वच्छ खान-पान और स्वच्छता की कमी को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। बारिश के मौसम में पानी के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे बच्चों में संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में साफ पानी का उपयोग और भोजन की स्वच्छता बेहद जरूरी है। जिस की रोकथाम पर जोर जरूरी है बच्चों में बढ़ते संक्रामक रोगों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के सामने अब बीमारी के उपचार के साथ उसकी रोकथाम की चुनौती भी है।अभिभावकों को बच्चों के खान पान, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। डायरिया होने पर शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस और पर्याप्त तरल पदार्थ देना जरूरी है। वहीं गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए। बच्चों में बीमारी के साथ कुपोषण के लक्षण सामने आने वाले दिनों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में उपचार व्यवस्था मजबूत करने के साथ ही संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए मैदानी स्तर पर भी प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।



