बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के संवेदनशील क्षेत्र में कार्रवाई पर हाईकोर्ट का फैसला, याचिकाएं खारिज धर्मस्थल नहीं, मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी अनुमति काअदालत ने स्पष्ट किया रुख राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में राज्य और देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। राजस्थान हाईकोर्ट ने भारत- के पड़ोसी देश अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित धार्मिक स्थलों सहित कुछ धार्मिक संरचनाओं को जारी किए गए नोटिसों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन्हें खारिज कर दिया। अदालत ने मामले को धार्मिक भेदभाव के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा, भूमि कानून और आवश्यक अनुमतियों से जुड़ा विषय माना। अदालत के समक्ष सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित क्षेत्रों में कुछ संरचनाएं आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना निर्मित होने की शिकायतों और सुरक्षा संबंधी इनपुट के आधार पर कार्रवाई के दायरे में आई हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीमा से लगेसंवेदन शील क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी जानकारी को सार्वजनिक करना हमेशा उचित नहीं होता। फैसले में यह महत्वपूर्ण बात भी सामने आई कि कार्रवाई किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि संवेदनशील सीमा क्षेत्र में अनधिकृत संरचनाओं के मामलों को उपलब्ध दस्तावेज, साक्ष्य और सुरक्षा इनपुट के आधार पर व्यक्तिगत रूप से जांचा जाना चाहिए। इसके लिए जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बीएसएफ के प्रतिनिधि वाली समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न आने पर सामान्य प्रक्रियाओं में परिस्थितियों के अनुरूप बदलाव की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन कार्रवाई कानून और उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही होनी चाहिए। हाईकोर्ट का फैसला इसी संतुलन को रेखांकित करता है आस्था का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन संवेदनशील सीमा क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और वैधानिक नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।


