बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) त्योहारों का मौसम आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री की आशंका भी बढ़ जाती है। शहर में इन दिनों मावे की मिठाइयों के दाम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब मावा करीब 400 रुपये किलो बिक रहा है, तो उससे तैयार होने वाली मिठाइयां 200 रुपये किलो में कैसे बेची जा रही हैं? कीमतों का यह अंतर उपभोक्ताओं के मन में संदेह पैदा कर रहा है।शहर की विभिन्न मिठाई दुकानों पर जलेबी सहित अन्य मिठाइयां कम कीमतों पर खुलेआम बिक रही हैं। जानकारों के अनुसार, मावा खरीदने से लेकर मिठाई तैयार करने और उसे दुकानों तक पहुंचाने में भी लागत आती है। ऐसे में मावे से बनने वाली मिठाइयों का मावे से भी कम कीमत पर बिकना जांच का विषय है। हालांकि, केवल कम कीमत के आधार पर किसी मिठाई को मिलावटी नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसकी गुणवत्ता की जांच जरूरी है।सस्ते दामों के पीछे का क्या है राज? त्योहारों पर लोग अपने परिवार के लिए मिठाइयां खरीदते हैं, लेकिन यदि इनमें मिलावट हुई तो यह लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक होकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ है ऐसे में सवाल उठता है कि बाजार में बिक रही मिठाइयों की गुणवत्ता की नियमित जांच हो रही है या नहीं। खाद्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मिठाई दुकानों से नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद यदि बाजार में संदिग्ध मिठाइयां बिक रही हैं, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है अब जरूरत है कि त्योहारों के दौरान मिठाई दुकानों की सघन जांच की जाए, मावे और तैयार मिठाइयों के नमूने लिए जाएं तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो। आखिर उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़े इस मामले में विभाग कब सक्रिय होगा?


