बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) डिजिटल युग में जब हर सरकारी प्रक्रिया को ऑनलाइन और त्वरित बनाने की बात की जा रही है, तब डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र जैसी मूलभूत सेवा पर अंकुश लगना आमजन के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहा है। नगर निगम बुरहानपुर द्वारा एक माह में केवल 100 डिजिटल जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की सीमा तय करना वर्तमान जरूरतों के बिल्कुल विपरीत है। नए सरकारी निर्देशों के अनुसार शिक्षा,स्वास्थ्य, पासपोर्ट, आधार, समग्र आईडी, छात्रवृत्ति, और अन्य अनेक योजनाओं के लिए डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है।आज स्थिति यह है कि माता-पिता अपने नवजात शिशु का समय पर जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवा पा रहे हैं। कई परिवार महीनों से नगर निगम के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सीमित संख्या का हवाला देकर आवेदन रोक दिए जाते हैं, जिससे लोगों में आक्रोश और असंतोष बढ़ रहा है यह व्यवस्था न केवल डिजिटल इंडिया की सोच के खिलाफ है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का भी हनन करती है। डिजिटल प्रमाण पत्र की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि नगर निगम की तैयारी और संसाधन उसी अनुपात में नहीं बढ़ाए गए हैं। प्रतिदिन सैकड़ों आवेदन आ रहे हैं, तो महीने में मात्र 100 प्रमाण पत्र जारी करना व्यावहारिक नहीं कहा जासकता। इससे गरीब, मजदूर और दूरदराज से आने वाले लोगों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा जरूरत इस बात की है कि नगर निगम बुरहानपुर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करे, कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए और तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग करे। साथ ही, आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी और समय बद्ध बनाया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े।












