नगर निगम में परिषद बैठक को लेकर सन्नाटा, विकास कार्य ठप

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) नगर निगम में परिषद की बैठक को लेकर अजीब स्थिति बनी हुई है। 23 जून से 23 दिसंबर छह माह की अवधि लगभग पूरी होने को है, लेकिन अब तक परिषद की नियमित बैठक को लेकर कोई ठोस पहल या सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही है। परिषद बैठकें समय पर न होने के कारण शहर के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के मुखर नेता भी पूरी तरह खामोश नजर आ रहे हैं। वहीं, नगर निगम में विपक्ष की भूमिका निभा रहे परिषद सदस्य भी किसी प्रकार का विरोध या दबाव बनाते दिखाई नहीं दे रहे हैं। परिषद में कई काबिल, अनुभवी और नियमों की गहरी जानकारी रखने वाले वरिष्ठ सदस्य मौजूद हैं। इनमें अधिवक्ता पृष्ठभूमि से जुड़े पार्षद भी शामिल हैं, जिन्हें नगर निगम अधिनियम और परिषद की कार्यप्रणाली की पूरी समझ है। इसके बावजूद समय पर बैठकें न होना कई सवाल खड़े करता है। बुरहानपुर नगर निगम में परिषद की बैठकें समय पर न होना अब एक तरह से परंपरा बंती जा रही है। इससे पहले जब परिषद की बैठकें नहीं हुई थीं, तब कांग्रेस सहित विपक्षी पार्षदों ने जमकर हंगामा किया और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए उस समय नगर निगम परिसर से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले लेकिन इस बार सभी पक्षों की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है
शहर वासियों का कहना है कि परिषद की बैठकें न होने से विकास योजनाएं स्वीकृति मूलभूत सुविधाओं से जुड़े निर्णय और जनहित के प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। सड़क, पानी, सफाई के बुरे हाल हैं दूषित जल को लेकर शहर डायरी की चपेट में आ चुका है जिसमें तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है बावजूद इसके चुनी हुई परिषद में कोई हलचल नहीं हुई । आम जनता यह जानना चाहती है कि आखिर इस बार सभी जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं और परिषद की बैठकें कब होंगी। नगर निगम में व्याप्त यह सन्नाटा कहीं किसी खास रणनीति या अंदरूनी सहमति की ओर तो इशारा नहीं कर रहा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

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