बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) यौम ए आशूरा की इबादत के बाद शहर में ताजियों का काफिला रात भर इकबाल चौक में रहा जहां अखाड़े में फनकारों ने लकड़ी और तलवार खेलकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया गया। इस से पूर्व आशुरे पर शिया समुदाय के द्वारा शिया इमाम बाड़े सिंधीपुरा से मातमी जुलूस निकाला गया जिसमें समुदाय के युवाओं और बुजुर्गों ने मातम किया यह मातमी जुलूस शिया इमाम बाड़े सिंधीपुरा से निकलकर शहर के प्रमुख मार्गो से होकर वापस इमामबाड़े पहुंच कर समाप्त हुआ इस मातमी जुलूस का नेतृत्व समाज के मुखिया इफ्तिखार जानी पहलवान के द्वारा किया गया उन्होंने मीडिया को जानकारी में बताया कि यह पर्व कर्बला में शहीद हुए इमाम हुसैन और शहीदों की याद में मनाया जाने वाला पर्व है बुराई पर अच्छाई के लिए हजरत इमाम हुसैन और उनके काफिले के 72 लोगों ने जंग की जिसमें वह शहीद हुए लेकिन इस्लाम जिंदा रह गया। मोहर्रम पर्व के चलते शहर में चार दिनों तक होने वाले विभिन्न आयोजनों के लिए जिला एवं पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए सुरक्षा की दृष्टि से शहर और मेला स्थल पर बैरिकेट्स लगाकर सुरक्षा की व्यवस्था की जिसमें 400 से अधिक पुलिस जवान मोबाइल पार्टियों ने पूरे चार दिवसीय आयोजन पर नजर रखी।सोमवार को खैराती बाजार स्थित ताप्ती नदी के पीपल घाट पर ताजियों का विसर्जन किया गया यहां भी प्रशासन की ओर से होमगार्ड जवानों के साथ आपदा प्रबंधन के जवानों को तैनात कर व्यवस्था की गई।












