बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) गणेश उत्सव पर स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमाओं की ऊंचाई प्रशासन के द्वारा 10 फीट निर्धारित की गई थी लेकिन इसको मूर्तिकारों ने नजरअंदाज किया जब की प्रशासन के अधिकारी ऊंचाई को लेकर मूर्तिकारों को चेताया निरीक्षण किए, कार्रवाई का प्रावधान भी बताया फिर भी बनती रहीं विशाल प्रतिमाएं गणपति स्थापना और विसर्जन में ऊंची प्रतिमाओं के होने से क्षेत्र में बिजली बंद होने का संकट, बना होता है जो अफसरों की निष्क्रियता का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा गणपति उत्सव को लेकर प्रशासन के आदेश एक बार फिर कागजों तक सिमटते नजर आ रहे हैं। गणेश प्रतिमाओं की अधिकतम ऊंचाई 10 फीट निर्धारित करने के बावजूद शहर में इससे बड़ी प्रतिमाओं का निर्माण जारी रहा। प्रशासन ने मूर्तिकारों को आदेश देकर नियमों का पालन करने के लिए पाबंद किया था। उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया था। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी समय रहते बड़ी प्रतिमाओं के निर्माण पर रोक नहीं लगा सके। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन को नियमों की जानकारी थी मूर्तिकारों के कारखानों का निरीक्षण भी किया जा रहा था तो फिर बड़ी प्रतिमाएं बनती कैसे रहीं? क्या अधिकारियों को प्रतिमाओं का आकार दिखाई नहीं दिया या फिर देखकर भी अनदेखा किया गया? परिणाम अब शहर अंधेरे में डूबेगा अधिकारियों ने मूर्तिकारों के कारखाने के दौरे खूब हुए लेकिन कार्रवाई गायब रही प्रशासनिक अधिकारियों ने समयसमय पर मूर्तिकारों के कारखानों का दौरा किया। निर्देश दिए गए और नियमों की याद दिलाई गई, लेकिन निरीक्षण के बाद कार्रवाई क्या हुई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यदि नियम तोड़े जा रहे थे तो दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? महज औपचारिक निरीक्षण से आखिर किसे संतुष्ट किया जा रहा था प्रशासन की नाकामी का खमयाजा बड़ी प्रतिमाओं केपरिवहन और विसर्जन के दौरान बिजली लाइनों से टकराव की आशंका को देखते हुए विद्युत व्यवस्था प्रभावित होगी ऐसे में गणपति स्थापना और विसर्जन के समय शहर के कई हिस्सों में बिजली बंद करना होगा सवाल यह है कि नियमों का पालन करवाने में नाकाम प्रशासन की सफलता का खामियाजा आम जनता क्यों भुक्ते नियम सिर्फ आम आदमी के लिए हैं क्या? प्रशासन ने 10 फीट की सीमा तय की थी तो उसे लागू करवाना भी उसी की जिम्मेदारी थी। लेकिन जिस तरह समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, उससे यही संदेश जा रहा है कि आदेश सिर्फ कागजों पर जारी करने के लिए हैं।अब यदि स्थापना और विसर्जन के दौरान शहर अंधेरे में डूबता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? जिन्होंने समय रहते कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाई आदेश जारी करने के बाद उसका पालन क्यों नहीं करवाया गया और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई!


