बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) आज के दौर में व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए बैंक, पोस्ट ऑफिस या अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा करता है। इसका उद्देश्य अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाना होता है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि खाताधारक एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया नॉमिनेशन को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में बड़ी परेशानी का कारण बनती है। नॉमिनेशन का अर्थ है कि खाताधारक अपनी जमा राशि के लिए किसी व्यक्ति को अधिकृत करे, ताकि उसकी मृत्यु के बाद वह राशि आसानी से उसे मिल सके। लेकिन जागरूकता की कमी या लापरवाही के आलम के चलते लोग इसे टाल देते हैं। परिणाम खाताधारक की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो परिवार के सदस्यों को उस राशि को प्राप्त करने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। कई बार यह प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि वर्षों तक पैसा अटका रहता है।इस स्थिति के लिए केवल खाताधारक ही नहीं, बल्कि संबंधित संस्थान भी जिम्मेदार हैं। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं का कर्तव्य है कि वे खाता खोलते समय नॉमिनेशन को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें और ग्राहकों को इसके महत्व के बारे में जागरूक करें। लेकिन कई बार संस्थाएं भी इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखातीं। समाधान के तौर पर जरूरी है कि खाता धारक स्वयं सजग रहें और खाता खोलते समय या बाद में भी नॉमिनेशन अवश्य दर्ज कराएं। साथ ही संस्थानों को भी इस प्रक्रिया को सरल और अनिवार्य बनाना चाहिए। जागरूकता और जिम्मेदारी के जरिए ही इस समस्या से बचा जा सकता है, ताकि भविष्य में परिवार को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना अनेक मामलों में यह भी देखा गया है कि संस्थानों में नॉमिनेशन कागजों पर तो किया जाता है लेकिन अब दौर कंप्यूटर का है वहां इसे दर्ज नहीं किए जाने से खाता धारक का नॉमिनेशन नहीं हो पता और बाद में उसे कहीं परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिम्मेदार अधिकारी कानून का हवाला देकर खातेदार की मदद से इनकार कर देते हैं इसलिए आवश्यक है कि अपनी मेहनत की गाड़ी कमाई को किसी भी संस्थान में रखने के साथ उसका नॉमिनेशन अनिवार्य रूप से कराए।











