बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) नगर निगम में लगभग 10 महीनों के लंबे अंतराल के बाद 22 अप्रैल को परिषद का सम्मेलन बुलाया गया है। इस प्रस्तावित सम्मेलन को लेकर शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इसी बैठक में 349 करोड़ का वार्षिक बजट पेश किया जाना है। उल्लेखनीय है कि इतने लंबे समय तक परिषद की बैठक नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर सवाल खड़े करता है। लगभग एक महा पूर्व पार्षदों से शहर और विकास से संबंधित कुछ प्रश्न मांगे गए थे, लेकिन अब तक उनके उत्तर नहीं दिए गए हैं। इससे पार्षदों में असंतोष का माहौल बना हुआ है। वहीं, नगर निगम महापौर द्वारा पिछले 10 महीनों में परिषद सम्मेलन क्यों नहीं बुलाया गया यह शहर में जन चर्चा का विषय बना हुआ है तथा इसको लेकर विपक्ष पर भी उंगलियां उठ रही है यह स्थिति न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि नगर विकास की गति को भी प्रभावित करती है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में विपक्ष की ओर से भी कोई ठोस कदमसामने नहीं आए है। उनकी चुप्पी से यह लगता है कि सत्ता और विपक्ष के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति होगी। परिषद की बैठक नहीं होने के कारण शहर के विकास कार्य ठप पड़े हैं। वार्डों का विकास अटका पड़ा है सड़कों, के निर्माण सफाई, जल व्यवस्था शहर में बढ़ता अतिक्रमण अवैध कॉलोनीओं का निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्ताव लंबित हैं। ऐसे में आगामी बजट सम्मेलन से शहरवासियो को काफी उम्मीदें हैं। 22 अप्रैल को प्रस्तावित यह बैठक वास्तव में होती है या फिर एक बार इसे टाल दिया जाता है। यदि बैठक होती है, तो यह जरूरी होगा कि जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा कर ठोस निर्णय लिए जाएं। लेकिन यहां भी विपक्ष के द्वारा कोई रणनीति अब तक सामने नहीं आने से बैठक के हंगामेदार होने का अंदेशा है।












