जन्म प्रमाण पत्रों का डिजिटलीकरण आम जन के लिए बना सर दर्द

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) सरकार द्वारा जन्म प्रमाण पत्रों को डिजिटल रूप में अनिवार्य किए जाने के चलते नगर निगम में इस को लेकर भीड़ बढ़ने के साथ यहां दलाल सक्रिय होते नजर आ रहे हैं सरकार का उद्देश्य यहां प्रशासनिक व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाना रहा हो, लेकिन यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए सिरदर्द उस वक्त बन जाती है जब पोर्टल के काम नहीं करने से तकनीकी परेशानी खड़ी हो जाती है तब और सर दर्द बनकर रह जाती है विशेष रूप से पुराने जन्म प्रमाण पत्रों को डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए नगर निगम कार्यालयों में भारी भीड़ देखी जा रही है।नगर निगम के जन्म–मृत्यु पंजीकरण विभाग में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने पुराने जन्म प्रमाण पत्रों को डिजिटल कराने के लिए पहुंच रहे हैं। सीमित स्टाफ और सीमित संसाधनों के कारण लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। कई मामलों में आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के अभाव में लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे आमजन में असंतोष बढ़ रहा है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए निगम परिसर के आसपास दलाल सक्रिय हो गए हैं। ये दलाल आम लोगों को जल्दी काम कराने का लालच देकर उनसे मोटी रकम एनठ रहे हैं। गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग इन दलालों के जाल में फंसकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। प्रशासन की ढिलाई और निगरानी की कमी के कारण दलालों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र शिक्षा, नौकरी, पासपोर्ट, आधार और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में इसका समय पर न बन पाना लोगों की समस्याओं को और बढ़ा देता है। इस पूरे मामले पर राजपुरा वार्ड के पार्षद अहफाज मुज्जु मीर ने नगर निगम के ज़िम्मेदार नगर निगम आयुक्त का ध्यान आकर्षित करते हुए एक पत्र लिखा है कि वह लोगों की इस समस्या पर तुरंत ध्यान देते हुए अतिरिक्त विंडो सहित स्टाफ की व्यवस्था करे ताकि इस प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को प्रभावी करे। साथ ही दलालों पर सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी सुनिश्चित करें ताकि डिजिटल व्यवस्था का लाभ आम जनता तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके।

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