बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) मोहर्रम पर्व के चार दिवसीय आयोजन का समापन यौम ए आशूरा की इबादत और मातमी जुलूस के साथ संपन हुआ। रविवार को शिया समुदाय के द्वारा सिंधीपुरा स्थित शिया इमामबाड़े से अलम के साथ मातमी जुलूस निकाला गया जो शहर के मुख्य वार्डो और बाजार से होकर वापस सिंधीपुरा इमामबाड़े पर समाप्त हुआ, जुलूस में रास्ते भर शिया समुदाय के युवाओं ने मातम कर अपने को लहू लोहान किया मातमी जुलूस के चलते रास्ते भर पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं कर मार्ग बंद किए गए थे इस के साथ ही ताजियों के होने वाले रविवार के रात्रि मेले अखाड़े और मर्सिया ख्वानी के सेल लगाने के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई है वहीं अखाड़े के लिए भी स्थान चयनित किए गए हैं। मातमी जुलूस का प्रतिनिधित्व करने वाले इफ्तार हुसैन जानी ने मीडिया को बताया कि यह मातमी जुलूस क्यों और किसकी याद में निकाल कर उन्हें क्यों याद किया जाता है, मातमी जुलूस में जहां शिया समुदाय के युवक अलम के सामने मातम करते रहे वहीं इस मातमी जुलूस की शान बना तिरंगा अलम के साथ तिरंगा भी लहरा कर भाईचारे देशभक्ति का संदेश देकर जुलूस का आकर्षण रहा।












