रस्मे इजरा के सिलसिले में अखिल भारतीय मुशायरा का आयोजन

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) फाजली उर्दू सोसायटी के तत्वावधान में 17 जून को अखिल भारतीय मुशायरा का आयोजन किया गया। डॉ. आरिफ अंसारी द्वारा संकलित पुस्तक “अख्तर आसिफ – हयात व खेदीमत” तथा मुहम्मद इस्माइल फहमी द्वारा रचित काव्य संग्रह ऐवान-ए-सुखना का प्रस्तुतीकरण किया गया रस्मे इजरा की तक़रीब पूर्व पार्षद मुहम्मद आसिफ अंसारी तथा डॉ. एसएम तारिक के दस्ते अदा की गई । मुशायरे का उद्घाटन मिर्जा इमरान बेग ने फीता काटकर किया। जबकि पार्षद हमीदुल्लाह खान ने मोमबत्तियां जलाने की परंपरा को पुनर्जीवित किया। अध्यक्षता का दायित्व उर्दू मित्र मास्टर फजलुर रहमान साहब ने निभाया। इस काव्य पाठ में प्रभावशाली स्थानीय कवियों, तथा विदेशी कवियों ने अपने-अपने अनूठे तथा विशिष्ट अंदाज में अपने तथा प्रतिभागियों के विचार व्यक्त किए। उद्घाटन समारोह का संचालन जावेद राणा और वकार आसिफी ने किया, जबकि मालेगांव शहर के इरशाद अंजुम ने शुरू से अंत तक प्रभावशाली तरीके से निजमात की जिम्मेदारी निभाई। कविता पाठ में हमीदुल हक फहमी, मुहम्मद इकराम गबबू सेठ, एसएम कादिर, इनाम अंसारी, जावेद, मीर, मुहम्मद अमीन, प्रोफेसर शकील अंसारी, अतिथि कवियों के साथ-साथ स्थानीय प्रभावशाली और मेजबान कवियों ने मंच की शोभा बढ़ाई। फाजली उर्दू सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. आरिफ अंसारी और पदाधिकारी और सदस्य एम. शब्बीर एडवोकेट, प्रोफेसर इसरारुल्लाह, डॉ. मुमताज अरशद, अल्ताफ अनवर, शब्बीर साजिद, शरर आसिफी, वकार आसिफी मुहम्मद हमीदुल्लाह और मजहर इस्लाम ने दर्शकों और मेहमानों से मुलाकात की और उनका शुक्रिया अदा किया। अ लाससुभा 4 बजे तक मुशायरा सफलतापूर्वक जारी रहा और मालेगांव के खुशफिक्र शायर वाहिद अंसारी साहब के नातिया कलाम के साथ मुशायरे का समापन हुआ।

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