Wednesday, September 2, 2026
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याद-ए-रफ़्तगान के तहत आयोजित हुवा मुशायरा

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) याद-ए-रफ़्तगान के तहत आयोजित मुशायरा साहित्य और संवेदनाओं का एक यादगार पर्व बन गया। इस भव्य काव्य समारोह ने न केवल शायरी की परंपरा को जीवित रखा, बल्कि गुज़र चुके अदीबों और शायरों को ख़िराज-ए-अक़ीदत भी पेश किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मास्टर फ़ज़लुर रहमान साहिब की गरिमापूर्ण उपस्थित मैं हुई वहीं, मशहूर शायरा शउर आशना ने निज़ामत की जिम्मेदारी बखूबी निभाते हुए पूरे आयोजन को सलीके और खूबसूरती से अंजाम तक पहुँचाया। महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य इलाकों से आए नामचीन शायरों ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लों और नज़्मों से सामाइन को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर शेर पर गूंजती तालियों ने यह साबित किया कि अदब के चाहने वाले आज भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। कार्यक्रम में खास मेहमान के रूप में बुरहानपुर महानगर पालिका की चेयरपर्सन अनीता यादव की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। इसके अलावा कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष रिंकू टांक ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए दिवंगत कवियों के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत जमील असगर साहब के विचारोत्तेजक भाषण से हुई, जिसने श्रोताओं को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद वाहिद अंसारी साहब की नात-ए-रसूल ने माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया। आयोजन समिति के सदस्य—असगर भाई, आरिफ भाई और नवाब भाई—का सहयोग भी सराहनीय रहा। मुशायरे के कन्वीनर इकबाल कोसैन ने शायरों की हौसला अफजाई कर कार्यक्रम को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। याद-ए-रफ़्तगान मुशायरा अदब, एहतराम और मोहब्बत की एक खूबसूरत मिसाल बन गया।

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