Tuesday, September 1, 2026
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जिहाद की सही परिभाषा समझना समय की आवश्यकता है—-स्कॉलर

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) जिहाद लंबे समय से मीडिया में चर्चा का विषय रहा है और हर किसी के लिए विचार-विमर्श का मुद्दा बना हुआ है लेकिन पिछले कुछ समय से अचानक इस विषय पर पहले से कहीं अधिक तीव्रता से बहस छिड़ गई है इस शोरगुल और अफरा-तफरी के बीच स्कॉलर अपनी अलग राय रखते हैं गहन अध्ययन करने पर पता चलता है कि जिहाद इस्लाम और कुरान में सबसे अधिक उत्पीड़ित शब्दों में से एक है जो इसका फायदा उठाकर अपने खूनी स्वार्थों को पूरा करते हैं जिहाद को समझने के लिए प्रमुख पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है जिहाद का सही अर्थ गलत धारणाओं को दूर करना, और पैगंबर मोहम्मद साहब का जीवन और आचरण को परखना है जिहाद का अर्थ केवल युद्ध तक सीमित नहीं है।बल्कि इसमेंआत्म-सुधार, बुराई का प्रतिरोध और न्याय की स्थापना के लिए प्रयास करना शामिल है। इस्लाम एक व्यापक जीवन शैली है जो शरीर, बुद्धि और आत्मा की आवश्यकताओं को एक साथ पूरा करती है। मानव जीवन के पहलुओं की पूर्ति और संतुष्टि के लिए है, जिहाद का संबंध मानवता की भौतिक शांति और स्थिरता से है: यह शक्ति और कानून का उपयोग करके दुनिया में न्याय स्थापित करना और अत्याचार को समाप्त करना है कुरान और हदीस की रौशनी में यह स्पष्ट हो जाता है कि हर प्रयास जिहाद नहीं कहलाता, इस्लाम में जिहाद वह महान प्रयास है जो अल्लाह की खुशनुदि के लिए किसी नेक उद्देश्य में ईमानदारी से किया जाता है।जिहाद को केवल युद्ध और सशस्त्र संघर्ष से जोड़ना एक बहुत ही आम और स्पष्ट गलत धारणा है। जबकि जिहाद मुसलमानों पर उस समय भी अनिवार्य था जब उन्हें हथियार उठाने या लड़ने की अनुमति नहीं थी लेकिन सवाल यह है कि सच्चाई को सामने लाने और झूठ के पर्दे को हटाने की जिम्मेदारी किस की है हमारे युवाओं को इस विषय पर कुरान और हदीस का अध्ययन करना चाहिए, किताबें पढ़नी चाहिए और गहन चिंतन करना चाहिए। इससे भ्रम दूर होगा, इस्लाम और मुसलमानों का सच्चा स्वरूप सामने आएगा आज जिहाद के नाम पर सोशल मीडिया पर इतनी भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं कि लोग प्रामाणिक इस्लामी शिक्षाओं से दूर होते जा रहे हैं।यह समय की मांग है की मुसलमानों को केवल प्रतिक्रियावादी बनकर नहीं जीना चाहिए, बल्कि न्याय, शांति और सकारात्मक चरित्र को अपनी सच्ची शक्ति के रूप में पहचानना चाहिए।

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