बुरहानपुरमध्य प्रदेश

उर्दू अकादमी द्वारा “सिलसिला एवं तलाशे जौहर” के तहत शेरि नाशित का हुआ आयोजन

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) ख़लीक़ बुरहानपुरी एवं वसीउद्दीन आरिफ़ को समर्पित मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, बुरहानपुर के द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत बुरहानपुर के प्रसिद्घ उस्ताद शायरों ख़लीक़ बुरहानपुरी एवं वसीउद्दीन आरिफ़ को समर्पित स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन 27 जुलाई, को बुरहानपुर में ज़िला समन्वयक शऊर आश्ना के सहयोग से किया गया। उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी द्वारा बुरहानपुर में आयोजित ‘सिलसिला’ साहित्यिक गोष्ठी और ‘तलाशे जौहर’ नई प्रतिभाओं की खोज, न सिर्फ़ उर्दू अदब की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि यह उन अदीबों और शायरों को ख़िराजे-अक़ीदत भी है जिन्होंने इस धरती की अदबी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर रौशन किया। इसी सिलसिले में अकादमी द्वारा इस कार्यक्रम को वसीउद्दीन आरिफ़ और उस्ताद शायर खलीक़ बुरहानपुरी जैसे दिवंगत साहित्यकारों के नाम समर्पित किया है, सिलसिला’ और ‘तलाशे जौहर’ जैसे आयोजन उर्दू अदब को नई ऊर्जा देने वाले मंच हैं। बुरहानपुर ज़िले के समन्वयक शऊर आश्ना ने बताया कि स्मृति एवं रचना पाठ दो सत्रों पर आधारित था। प्रथम सत्र में दोपहर 3 बजे तलाशे जौहर प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें ज़िले के नये रचनाकारों ने तात्कालिक लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। निर्णायक के रूप में खरगोन के उस्ताद शायर मन्सूर कमाल एवं इंदौर के वरिष्ठ शायर अहमद निसार मौजूद रहे जिन्होंने प्रतिभागि शायरों को दो तरही मिसरे दिये। दिये गये मिसरों पर नए रचनाकारों द्वारा कही गई ग़ज़लों पर एवं उनकी प्रस्तुति के आधार पर आबिद नज़र ने प्रथम,अनवर माही ने द्वित्तीय एवं सलीम शहज़ाद ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले तीनों विजेता रचनाकारों को उर्दू अकादमी द्वारा नगद इनाम के साथ प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। दूसरे सत्र में शाम 4बजे सिलसिला के तहत स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन हुआ जिसकी अध्यक्षता बुरहानपुर के वरिष्ठ शायर अल्ताफ़ ख़लीक़ी ने की। वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में जलील अहमद, मुशर्रफ़ खान, ऐजाज़ अशरफ़ी एडवोकेट मनोज अग्रवाल मंच पर उपस्थित रहे। इस सत्र के प्रारंभ में प्रसिद्घ उस्ताद शायरों ख़लीक़ बुरहानपुरी एवं वसीउद्दीन आरिफ़ के व्यक्तित्व पर बिस्मिल्लाह अदीम एवं डॉ फ़रज़ाना अन्सारी ने चर्चा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बिस्मिल्लाह अदीम ने वसीउद्दीन आरिफ़ के व्यक्तित्व एवं पर चर्चा कि उन्होंने बताया कि उनकी दो पुस्तकें ‘बदलती सम्तें’ और ‘नवाए आरिफ़’ के नाम से प्रकाशित हुईं। वहीं डाॅ. फ़रज़ाना अंसारी ने उस्ताद शायर ख़लीक़ बुरहानपुरी के बारे में बताते हुए कहा कि बुरहानपुर में 1906 में जन्मे प्रख्यात शायर हमीदुल्लाह खलीक़ बुरहानपुरी ने पूरे भारत में बुरहानपुर का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय स्तर पर अनेक मुशायरों में भाग लिया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बुरहानपुर में ही प्राप्त की। शायरी का शौक़ उन्हें बचपन से ही था। उन्होंने अपनी पहली ग़ज़ल 1928 में कही। अपनी प्रभावशाली शायरी और मनमोहक तरन्नुम से उन्होंने लाखों दिलों पर राज किया। बुरहानपुर और आसपास के शायर उनसे अपनी रचनाओं के सुधार के लिए मार्गदर्शन लिया करते थे। उनका एक काव्य संग्रह ‘सदफ़’ के नाम से प्रकाशित हुआ उर्दू अकादमी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जिन शायरों और लेखकों ने इसमें भाग लिया उसमें मंसूर कलाम फैज खलीकी वाहिद अंसारी बिस्मिल्लाह अदीम एजाज उम्मीद ठाकुर वीरेंद्र सिंह चित्रकार रमेश धुआंधार महबूब परवेज खालिद अंसारी आबिद कज़लबाज़ मुख्तार आकिल आदि शेयरों ने भाग लिया कार्यक्रम का संचालन शऊर आशना के द्वारा कर सभी का आभार माना!

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