अवैध कॉलोनियां खाने-कमाने का साधन बनता अवैध कारोबार

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) अवैध कॉलोनियों का मकड़ जाल दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। शहर के चारों ओर इन कॉलोनियों का विस्तार हो रहा है, जहाँ हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी खून-पसीने की कमाई से एक छत का सपना संजोते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इन कॉलोनियों का निर्माण नियमों और कानूनों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। कॉलोनी नाइजरों द्वारा प्लॉट तो बेच दिए जाते हैं, लेकिन वहां मूलभूत सुविधाए नहीं दी जाती हैं। अवैध कॉलोनियाँ अब केवल आवास का नहीं, बल्कि कुछ लोगों के लिए खाने-कमाने का जरिया बन चुकी हैं। ज़मीन का टुकड़ा बेचकर लाखों-करोड़ों की कमाई करने वाले बिना वैधानिक प्रक्रिया के। नक्शा स्वीकृति, पानी, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई चिंता नहीं कर अवैध उगाई में लगे हुए हैं जब समस्याएँ सामने आती हैं, तो प्लॉट धारक प्रशासन के चक्कर काटते हैं और कॉलोनी नाइजर लापता हो जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है खाने कमाने का चक्कर प्रशासन में अवैध कॉलोनीयों का जिन जब ही बोतल से बाहर आता है तब यहां प्रशासनिक हेर फेर होता है प्रशासन की ओर से समय रहते कोई कड़ी कार्यवाही नहीं होने के कारण ये लोग और अधिक साहसी हो गये हैं। अगर समय रहते इन पर लगाम लगाई जाए तो गरीबों को न्याय मिल सकता है और शहर की सुंदरता और नियोजित विकास को गती!

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