समान नागरिक संहिता के विरोध में ज्ञापन, लागू नहीं करने की राष्ट्रपति से मांग

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) समाननागरिक संहिता कॉमन सिविल कोड को लेकर मिल्लीकाउंसिल की ओर से विरोध जताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि देश में समान नागरिक संहिता को लागू नहीं किया जाए। काउंसिल पदा धिकारि वाजिद इक़बाल फहीम हाशमी ने कहा कि भारत विविध धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों वाला देश है, जहां प्रत्येक समुदाय को अपनी धार्मिक परंपराओं और रीति रिवाजों के अनुसार जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। अलग-अलग धर्मों की अपनी मान्यताएं, परंपराएं और व्यक्तिगत कानून हैं, जिनका पालन समुदाय लंबे समय से करते आ रहे हैं। ऐसे में समान नागरिक संहिता लागू करने से धार्मिक और सामाजिक परंपराओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। काउंसिल के प्रति निधियों ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा जबरन अल्पसंख्यकों को परेशान करने के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि कानून बनाने से पहले सभी धार्मिक और सामाजिक वर्गों से व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी तौर से लेनी चाहिए थी! प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि देश की सामाजिक और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल भावना सभी धर्मों और समुदायों को समान सम्मान और स्वतंत्रता देने की है। ज्ञापन सौंपते समय काउंसिल के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।



