पुरानी व्यवस्थाओं के बीच शुरू हुआ शिक्षा का नया सत्र

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) पुरानी व्यवस्थाओं के बीच नया सत्र: उत्साह के साथ चुनौतियां भी बरकरार शिक्षा का नया सत्र 16 जून से प्रारंभ हो चुका है। लंबे अवकाश के बाद स्कूली छात्र-छात्राएं बड़े उत्साह और उमंग के साथ अपने विद्यालय पहुंचे। नए सत्र की शुरुआत बच्चों के लिए हमेशा नई उम्मीदें, नए लक्ष्य और नए सपने लेकर आती है। लेकिन इस बार भी कई प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। कई स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए टाट-पट्टी तक उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा, स्कूल परिसरों मेंसाफ सफाई का अभाव और रंग-रोगन की कमी भी स्पष्ट दिखाई दे रही है। दीवारों की उखड़ी पुताई और गंदगी भरा वातावरण बच्चों के मनोबल को प्रभावित करता है। नए सत्र के स्वागत की तैयारियां भी कई स्थानों पर अधूरी नजर आईं। जहां एक ओर बच्चों का उत्साह चरम पर था वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रशासन की लापरवाही सामने आई। शासन द्वारा हर वर्ष स्कूलों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और साफ सफाई के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग और प्रशासन समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान दें। बच्चों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी शिक्षा के अधिकार का हिस्सा है। यदि हम भविष्य की पीढ़ी को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो स्कूलों की मूलभूत व्यवस्थाओं को सुधारना अनिवार्य होगानया सत्र केवल औपचारिक शुरुआत न बनकर वास्तव में नई उम्मीदों और बेहतर व्यवस्थाओं का प्रतीक बनना चाहिए।

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