बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) कट्टरपंथियों कीचुनिंदा व्याख्या से मुस्लिम-विरोधी दुष्प्रचार, बढा सच्चे इस्लाम की खोज में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है सही ज्ञान नहीं होने के चलते ही कट्टरवाद बढ़ रहा है जो इस्लामी शासन न्याय, परामर्श और जवाबदेही पर आधारित है। यह हेरफेर अत्याचार को धार्मिक आवरण में ढालने का अवसर नहीं देता है, जिससे लोग इस्लाम के आध्यात्मिक और नैतिक संदेश से दूर हो।हदीस का दुरुपयोग इस्लाम की वैश्विक स्तर पर गलत व्याख्या में योगदान नहीं देता है। इस्लामी ग्रंथों से अपरिचित गैर-मुस्लिम इन हिंसक दमनकारी व्याख्याओं को मानक मान सकते हैं। लेकिन स्वयं मुसलमान, खासकर वे जिनकी प्रामाणिक मान्यता है, वह कभी इसे सही नहीं मान सकता इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, शिक्षा न केवल एक आवश्यकता बल्कि एक धार्मिक कर्तव्य भी बन जाती है।इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर एक दायित्व है। मुसलमानों को प्रामाणिक और मनगढ़ंत हदीसों के बीच अंतर करने के लिए आवश्यक है कि वह दीन का इल्म हासिल करें और हदीस की रोशनी में उसे पर यकीन करें युवा मुसलमान इस्लाम-विरोधी भावनाओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। शैक्षणिक संस्थानों, मस्जिदों और परिवारों को आलोचनात्मक सोच, ऐतिहासिक जागरूकता और नागरिक उत्तरदायित्व के साथ-साथ प्रामाणिक इस्लामी मूल्यों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं। यहां गैर-मुसलमानों को भी इस्लामी शिक्षाओं के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करना चाहिए। इस्लाम के अकादमिक अध्ययन केंद्र और मीडिया साक्षरता सेंट्रो से इसकी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए शिक्षा गलतफहमियों के बीच का सेतु है। केवल सीखने, प्रश्न करने और सत्य की खोज के माध्यम से ही मुसलमान और गैर-मुस्लिम दोनों ही वास्तविक इस्लाम को जान सकते हैं। धार्मिक ज्ञान की कमी के चलते ही कट्टरवाद को बढ़ावा मिल रहा है!











