बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) धार्मिक और सामाजिक सहिष्णुता पर स्कॉलर का मत है कि इस्लाम का संदेश शांति दया और क्षमा देना है इस गहन संदेश के आलोक में ही आज इस विषय पर विचार करना आवश्यक है। ऐसे समय में जब विश्व के विभिन्न भागों में मतभेद, धार्मिक और सामाजिक तनाव, घृणा और असहिष्णुता की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, इस्लाम की उन शिक्षाओं को समझना अत्यंत आवश्यक हो गया है जो मनुष्य को धैर्य, सहिष्णुता, करुणा, न्याय और क्षमा की ओर मार्गदर्शन करती हैं। इस्लाम केवल पूजापाठ का धर्म नहीं है; यह एक व्यापक नैतिक ढांचा भी प्रदान करता है जिसमें मानव जीवन, गरिमा, शांति और सामाजिक उत्तर दायित्व का सर्वोपरि स्थान है इस्लाम अत्याचार या अन्याय को स्वीकार करना नहीं सिखाता। इस्लाम निष्पक्षता को बहुत महत्व देता हैं। हालांकि, न्याय और व्यक्तिगत प्रतिशोध एक समान नहीं हैं। क्रोध में आकर कानून को अपने हाथ में लेना, हिंसा का सहारा लेना या किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना सामाजिक समस्याओं को और भी जटिल बना सकता है।पैगंबर मोहम्मद साहब का जीवन और आचरण दया, क्षमा, अच्छे चरित्र और मेल-मिलाप के अनेक उदाहरण प्रस्तुत करता हैं। उन्होंने दूसरों के प्रति दयालुता पर जोर दिया और ज्ञान, धैर्य और कोमलता को अपनाया। उनकी शिक्षाएँ दर्शाती हैं कि हृदय नफरत से नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र, करुणा और नैतिक आचरण के माध्यम से लोगों को करीब लाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह बात भी उतनी ही महत्वपूर्ण है कि कुरान और हदीस की शिक्षाओं को इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों रूप दिया है यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि धार्मिक ग्रंथों की न तो गलत व्याख्या हो और न ही उनका उपयोग हिंसा या अतिवाद को औचित्य सिद्ध करने के लिए किया जाए।


