Thursday, September 3, 2026
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शिक्षा बनी व्यापार का साधन हर गली में खुलते स्कूलों पर उठते सवाल जिम्मेदार मौन

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) शिक्षा को समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार माना जाता है, लेकिन बदलते समय में यह क्षेत्र तेजी से व्यवसाय का रूप लेता दिखाई दे रहा है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जिस तेजी से निजी स्कूल खुल रहे हैं, उसने शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि मानो हर गली और मोहल्ले में चाय पान की टपरी की तरह एक नया स्कूल खुलता नजर आ रहा है। इस तरह तेजी से खुलती कई निजी स्कूल निर्धारित मानकों और आवश्यक सुविधाओं की अनदेखी कर केवल आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे हैं। पर्याप्त खेल मैदान,प्रशिक्षित शिक्षक, पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला, सुरक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक मूल भूत सुविधाओं के बिना ही कई स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। अभिभावकों को सुनहरी सपने दिखाकर उन से मनमानी फीस और अन्य मदों में अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। जिस पर शिक्षा विभाग का कोई नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है स्थानीय जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय मूकदर्शक बने हुए हैं शिक्षा के जानकारों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बजाय स्कूलों के बीच प्रतिस्पर्धा अब अधिक दिखाई दे रही है हर स्कूल अधिक छात्रों को जोड़ने और आर्थिक लाभ कमाने की जुगाड़ में है यह स्कूल आकर्षक विज्ञापनों, अंग्रेजी माध्यम और आधुनिक सुविधाओं के दावों के सहारे अभिभावकों को लुभाया जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति दावों से बिल्कुल अलग होती है।अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य की चिंता के कारण वे भारी फीस देने को मजबूर हैं, लेकिन इसके अनुपात में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कई स्कूलों में हर वर्ष फीस वृद्धि, किताबों और यूनिफॉर्म की अनिवार्यता तथा अन्य शुल्कों का अतिरिक्त बोझ भी परिवारों पर पड़ रहा हैशिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती इस प्रवृत्ति को देखते हुए लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की नियमित जांच कराई जाए बिना मापदंड पूरे किए किसी भी स्कूल को चालू करने से रोका जाए तथा जब तक मानकों का पालन नहीं होता तब तक उन्हें किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी जाए एसा करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि शिक्षा सेवा का माध्यम होना चाहिए, केवल व्यापार का नहींशिक्षाविदों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री और मुनाफे तक सीमित होकर रह जाएगा, जिसका सबसे बड़ा नुकसान आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा।

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