गुजरात के संस्थापक सुल्तान की सोच धार्मिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है

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बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) गुजरात प्रदेश के संस्थापक अहमद शाह की राजनीतिक और धार्मिक सोच का परिणाम है कि उनके द्वारा जुनी जुम्मा मस्जिद का निर्माण कराया गया जुनी जुम्मा मस्जिद और सुल्तान अहमद शाह प्रथम गुजरात की स्थापत्य कला और सांस्कृतिक इतिहास में सुल्तान अहमद शाह प्रथम का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे गुजरात के संस्थापक थे और 1411 ईस्वी में अहमदाबाद नगर की स्थापना का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है कला–संरक्षण की भावना ने गुजरात को अनेक अद्भुत स्मारकों से समृद्ध किया। इन्हीं में से एक है जुनी जुम्मा मस्जिद, जिसे उन्होंने अपने शासनकाल के प्रारंभिक वर्षों में बनवाया था। जुनी जुम्मा मस्जिद, जिसे जामा मस्जिद के पूर्व वर्ती के रूप में भी देखा जाता है, अहमद शाह की धार्मिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करती है। इस मस्जिद का निर्माण न केवल धार्मिक उपयोग के लिए किया गया था, बल्कि इसे नव स्थापित राजधानी में इस्लामी संस्कृति और परंपरा को स्थापित करने के प्रयास के रूप में भी देखा जाता है। गुजरात की इस मस्जिद में कौमी यज्ञ जेहति स्थापत्य शैली का मिश्रण देखने को मिलता है, जो उस समय की स्थानीय कारीगरी और सुल्तान के समन्वय वादी दृष्टिकोण का प्रमाण है। मस्जिद के स्तंभ, मेहराब, छतरियाँ और जटिल नक्काशी उस युग की शिल्प कला को दर्शाती हैं। अहमदाबाद की प्रसिद्ध जामा मस्जिद के लिए आधार बनी। जुनी जुम्मा मस्जिद ने शहर में धार्मिक और सामाजिक जीवन को केंद्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुल्तान अहमद शाह प्रथम ने मस्जिदों के निर्माण के माध्यम से न केवल अपनी धार्मिक आस्था प्रकट की, बल्कि एक सुदृढ़ और सांस्कृतिक रूप से उन्नत राज्य की नींव भी रखी। जो आज भी उनकी दूरदर्शिता, कला–प्रेम और कौशल की अमिट विरासत के रूप में खड़ी है।

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