Friday, September 4, 2026
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नवजात और प्रसुता की मौत मामले पर स्वंय की पीठ थपथपाती जांच रिर्पोट

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) जिला अस्पताल में 11 मार्च को फतहपुर बोरंगांव निवासी एक प्रसुता की तीन दिनों तक भर्ती होने के बाद भी समान्य डिलेवरी होने का बहाना बनाकर तबियत बिगडने पर आनन फानन में ऑपरेशन किया गया बच्चा 4 किलो से अधिक वजन का होने से सामान्य डिलेवरी नही हो रही थी अधिक तबियत बिगडने पर ऑपरेशन के समय नवजात की मौत हो गई तथा प्रसुता की तबियत बिगडने पर उसे निजी अस्पताल रिफर कर दिया गया जहां प्रसुता ने दम तोड दिया घटना के समय जिला अस्पताल के डाक्टरों ने स्वीकार किया की ऑपरेशन से डिलेवरी कराने में देरी हुई थी और जब मामला बढा कलेक्टर ने अस्पताल पहुंच कर मामले की गंभीरता को देख जांच के आदेश दिए तो सिविल सर्जन ने अस्पताल के आरएमओ डॉ गौर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ मोहनीश गुप्ता और डॉ आर्यन गडवाल की टीम बनाकर मामले की जांच सौंप दी। जिन डाक्टरो पर लापरवाही के आरोप परिजन लगा रहे थे उनही के हाथों जांच तो परिणाम क्या होंगे जांच टीम ने अपनी रिर्पोट में प्रसुता की मौत का कारण कॉर्डियक अरैस्ट बताकर मामले की लीपा पोती कर दी जब कि प्रसुता की मौत निजी अस्पताल में हुई है, जांच रिर्पोट देकर स्वंय अपनी पीट थपथपाकर दोषीयों को बचा लिया गया। प्रसुता की मौत के बाद उसका पीएम नही हुआ, जांच टीम में जिला अस्पताल से हटकर कोई बाहरी डाक्टर नही शामिल किया गया, मृतक के परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया, जिला अस्पताल में यह पहला मामला नही है यहां सैकडों प्रसुताओं की मौत का कारण केवल लापरवाही रहा है, लेकिन फिर भी उच्च अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौन है के जांच की औपचारिक्ता पूरी कर दोषीयों को बचाने का काम किया गया है, जिस पर कलेक्टर हर्ष सिंह को स्वंय संज्ञान लेना चाहिए।

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