बुरहानपुरमध्य प्रदेश

पोषण पुनर्वास केंद्र के बुरे हाल ए सी वाटर कूलर बंद माताओं को परोसा जा रहा मरीजों का भोजन

बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) जिला चिकित्सालय परिसर में स्थापित एन आर सी पोषण पुनर्वास केंद्र का उद्देश्य कुपोषित बच्चों को समुचित देखभाल, उचित उपचार और पौष्टिक आहार देकर स्वस्थ बनाना होता है। लेकिन जब इसी केंद्र की हालत बदहाल हो जाए, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां 38 डिग्री की भीषण गर्मी में कुपोषित बच्चे और उनकी माताएं गर्मी से परेशान हैं, जबकि केंद्र की अटेंडेंट ऐ सी मैं मीठी नींद सो रही है ऐसी परिस्थितियों में बच्चों का स्वास्थ्य सुधरने के बजाय और बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि जहां एक ओर बच्चे और माताएं गर्मी से जूझ रहे हैं, पीने को ठंडा पानी नहीं बच्चों को खेलने के लिए खिलौने नहीं वहीं केंद्र की अटेंडेंट एसी कमरे में आराम फरमा रही है। यह न केवल लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की कमी भी उजागर करता है। पुनर्वास केंद्र में तैनात कर्मचारियों का कर्तव्य है कि वे बच्चों और माताओं की हर संभव देखभाल कर सहायता करें, न कि अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लें। इसके अलावा, कुपोषित बच्चों की माताओं को पौष्टिक आहार देने के बजाय सामान्य मरीजों को मिलने वाला भोजन दिया जा रहा है, जो अत्यंत गंभीर समस्या है। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों और उनकी माताओं के लिए विशेष आहार की आवश्यकता होती है, जिसमें पर्याप्त पोषक तत्व शामिल हों। यदि उन्हें सामान्य भोजन ही दिया जाएगा, तो उनके स्वास्थ्य में सुधार कैसे संभव है? यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी एवं जिला कलेक्टर तुरंत इस मामले का संज्ञान लें, केंद्र की व्यवस्थाओं को सुधारें और यह सुनिश्चित करें कि कुपोषित बच्चों को सही देखभाल उचित पोषण ठंडा जल और बच्चों को खेलने के लिए खिलौने के साथ ठंडा वातावरण मिले। तभी इस केंद्र का उद्देश्य सार्थक हो सकेगा। ज्ञात हो की शासन द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए लाखों रुपया खर्च किया जा रहा है लेकिन पुनर्वास केंद्र में ही बच्चों को उचित देखभाल और माता को पौष्टिक भोजन नहीं मिले तो ऐसे में भला किस प्रकार कुपोषण दूर होगा और इसी का कारण है कि जिला कुपोषण मुक्त नहीं हो सका है।

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