बुरहानपुर (अकील ए आज़ाद) शिक्षा विभाग की लापरवाही से उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अधर में, कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की गई है शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शैक्षणिक सत्र का लगभग आधा समय बीतने को है, लेकिन जिले के कई स्कूलों में अब तक उर्दू भाषा की पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में उर्दू विषय लेकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बिना पाठ्य पुस्तकों के ही अध्ययन करना पड़ रहा है। यह स्थिति शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करने के साथ ही उर्दू भाषा के प्रति विभागीय उदासीनता पर भी सवाल खड़े कर रही है। मामले को लेकर अखिल भारतीय उर्दू शिक्षक संघ के मध्य प्रदेश सलाहकार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बुरहानपुर कलेक्टर के संज्ञान में इस गंभीर समस्या को लाते हुए हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जब शैक्षणिक सत्र का महत्वपूर्ण समय निकल रहा है तब भी विद्यार्थियों को उनकी भाषा की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं होना शिक्षा व्यवस्था की बड़ी खामी है। उर्दू विषय के विद्यार्थियों के सामने पाठ्य पुस्तकों के अभाव में नियमित अध्ययन पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा की तैयारी करने जैसी समस्याएं खड़ी हो रही हैं। सवाल यह है कि शिक्षा विभाग ने सत्र शुरू होने से पहले पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की आखिर जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं सवाल यह है कि उर्दू भाषा के विद्यार्थियों के साथ अन्याय क्यों शिक्षा का अधिकार प्रत्येक विद्यार्थी को समान अवसर उपलब्ध कराने की बात करता है। ऐसे में भाषा के आधार पर विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री से वंचित रहने देना उचित नहीं है अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और विद्यार्थियों को उर्दू की पाठ्य पुस्तकें कब तक उपलब्ध कराई जाती हैं।


